उम्र के निशान ,red rose on the streets. Lamhe Zindagi Ke, Hindi Poetry on Life
Long Poems

उम्र के निशान

Poem: उम्र के निशान

” इंद्रधनुषी रंगों से भरे ,
 बुलबुले से सपने , 
रात की नाभि पर ,
नींद भर लट्टूओं सा नाचते रहे ।
सुबह की उंगली क्या लगी ,
फूट कर अंधेरों में जा घुले ।
दिन उड़ाता रहा शाम तलक उम्मीद की पतंगें , 
सपनों के इंद्रधनुषी मांजे शाम तलक उंगलियां काटते रहे ।
शाम एक मां की तरह दिन को थपकियां दे कर सुलाती रही ,
और रात उसकी कोख से सपनों की नई पौध काटती रही ,
ना कुछ हुआ , ना कुछ होना था ,
ज़िन्दगी बस उम्र के ,
निशान संभालती रही ।

Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog – Lamhe Zindagi Ke

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