क्या तुम्हे मैं , अब भी याद आती हूं ।
Long Poems

क्या तुम्हे मैं , अब भी याद आती हूं ।

” क्या तुम्हे मैं ,अब भी याद आती हूं ।या फिर उन कागजों को तुमनेएक खाली फाइल में पंच कर किसी ड्रॉअर में रख दिया है ।तुम्हे शायद याद होगा ,उस वकील और उस जज का नाम ,तुम्हारे रिटर्न्स में ,उनके नाम की कुछ रसीदें लगी होंगी ,पर , क्या तुम्हे मैं ,अब भी याद आती […]

किस्सा, hindi poetry
Long Poems

किस्सा

कोरे पन्ने पर शुरू हुई , शब्दों में  उलझ कहानी हो गई जिंदगी ।खोजते खोजते खुद को ,एक बात के अनेक अर्थों की डिक्शनरी हो गई जिंदगी ।कोई सवाल तो थी ही नहीं ,जाने क्यूं लोग बूझते रहे एक पहेली के नाम से यूं ही बदनाम हो गई जिंदगी ।कोई मिला ही कब था रूबरू इससे यूं ही इसके इश्क़ में कहते है कि एक दौड़ […]

इतिहास
Long Poems

इतिहास

इतिहास की चौखट पर ………..जब जब भविष्य पाँव रखता है………वर्तमान का तब तब मूक बलात्कार होता है………सब होते हैं….मगर………कोई दर्शक नहीं होता……सच तो ये है सब साँस ले रहे होते हैं…….मगर वही एक पल नहीं होता………कब इतिहास भविष्य को एक चेतावनी देता है…….कब भविष्य का कदम उसे इतिहास बनाता है………जीवन कहते हैं वर्तमान में चलता […]

यादों के खुशनुमा फूल , flowers on grave
Short Poems

यादों के खुशनुमा फूल

खुले हुए कूड़ेदान से उठती हुई बदबू……… जैसे किसी ने पीली हुई किताब के पन्ने पलट दिए हों…… गुजरा वक़्त लिहाफ़ नही………. धूप दिखा के फिर ओढ़ लिया जाए……. ये तो वो सूखे हुए बीज हैं……. जिन्हे दफ़्न कर दो …….. तभी यादों के खुशनुमा फूल खिलते हैं….. Hindi Poetry by Nikhil KapoorBlog: Lamhe Zindagi […]

Long Poems

जाते जाते

जाते जाते कल ,यहीं थम गया था वक़्त ।पुकारना चाहता था तुम्हें ,मगर किस नाम से पुकारे ,इसी कश्मकश में ,कल यहाँ बिखर गया था वक़्त ।तुम बहुत आगे निकल गए थे शायद ,तेरे पीछे आने की चाहत में ,मेरे पाँव में कल धँस गया था वक़्त ।

मृत्यु, bonsai tree
Philosophy

मृत्यु

” मृत्यु को जीवन का अंत समझ लेना हमारे अंदर मृत्यु के प्रति भय को जन्म देता है , और इस भय से होती है मोह की उत्पत्ति , और मोह से उत्पन्न होती है कर्मों की उलटी गिनती “ Hindi Poetry by Nikhil KapoorBlog: Lamhe Zindagi Ke Social Media LinksFacebookInstagramYoutube

मैं, bedding
Short Poems

मैं

” मैं जिस्म नहीं हूं ,मैं जां भी नहीं हूं ,मैं दिल भी नहीं ,मैं खुदा भी नहीं हूं ,मैं लम्हा हूं बस एक जो जिया था तुमने ,तुम्हारे जिस्म से बहे पसीने की सांसों में मैं हूं ,वो चादर की सिलवटों में लिपट के जो सोया ,वक़्त की दो सुइयों की एक लम्हे की चाहत […]

Hindi poetry titled अजीब सा खालीपन हैं
Short Poems

अजीब सा खालीपन हैं

अभी अभी पढ़ के एक दिन फाड़ा हैबचे हुए टोस्ट के टुकड़े खाली प्लेट में अब भी पड़े हैअजीब सा खालीपन हैंयादों की गुल्लक इतनी भर गयी है शायद कितना भी हिलाओ ये अब बजती नहीं। Hindi Poetry by Nikhil KapoorBlog: Lamhe Zindagi Ke Social Media LinksFacebookInstagramYoutube

उम्र के निशान ,red rose on the streets. Lamhe Zindagi Ke, Hindi Poetry on Life
Long Poems

उम्र के निशान

Poem: उम्र के निशान ” इंद्रधनुषी रंगों से भरे , बुलबुले से सपने , रात की नाभि पर ,नींद भर लट्टूओं सा नाचते रहे ।सुबह की उंगली क्या लगी ,फूट कर अंधेरों में जा घुले ।दिन उड़ाता रहा शाम तलक उम्मीद की पतंगें , सपनों के इंद्रधनुषी मांजे शाम तलक उंगलियां काटते रहे ।शाम एक मां की तरह दिन को थपकियां […]

"मौत""जिंदगी" cremation of dead body
Short Poems

“मौत”-” जिंदगी”

आदतन “मौत” एक कहानी लिखने बैठी,बिखरने लगे जब पन्ने सारे,हसरत की जिल्द में बाँध उनको,“बेखयाली” में नाम की जगह ” जिंदगी” लिख बैठी | Hindi Poetry by Nikhil KapoorBlog: Lamhe Zindagi Ke Social Media LinksFacebookInstagramYoutube Channel